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पेट दरà¥à¤¦ से रोता है शिशॠतो इस मसाले से करें फà¥à¤°à¥€ में इलाज
हींग में अनेक औषधीय गà¥à¤£ होते हैं और शिशॠको à¤à¥€ इससे कई तरह के लाठमिलते हैं। बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को पेट दरà¥à¤¦ से राहत दिलाने के लिठहींग उपयोगी है।
बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को कोलिक पेन (पेट दरà¥à¤¦ के कारण शिशॠका रोना) अकà¥â€à¤¸à¤° परेशान करता है जिसकी वजह से वो बहà¥à¤¤ रोते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में मांओं को समठनहीं आता कि शिशॠके दरà¥à¤¦ को कम करने के लिठकà¥â€à¤¯à¤¾ करें। हींग शिशॠके दरà¥à¤¦ को कम करने में बहà¥à¤¤ असरकारी होती है। इसका इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ वà¥â€à¤¯à¤‚जनों में खूब किया जाता है। पेट दरà¥à¤¦ और कोलिक से राहत पाने के लिठहींग लाà¤à¤•ारी उपाय है।नवजात शिशॠके लिठहींगहींग नवजात शिशà¥à¤“ं के लिठसà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है लेकिन इसे सीधे तौर पर नहीं खिला सकते हैं कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि बचà¥â€à¤šà¥‡ का पाचन तंतà¥à¤° बहà¥à¤¤ कमजोर होता है। चूंकि, इस मसाले का सà¥â€à¤µà¤¾à¤¦ बहà¥à¤¤ तेज होता है और औषधीय गà¥à¤£à¥‹à¤‚ के कारण हींग का पेसà¥â€à¤Ÿ बनाकर उससे शिशॠके पेट की हलà¥â€à¤•े हाथों से मालिश करें। 10 महीने से कम उमà¥à¤° के बचà¥â€à¤šà¥‡ को हींग नहीं खिलानी चाहिठकà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि इस समय तक बचà¥â€à¤šà¥‡ का इमà¥â€à¤¯à¥‚न सिसà¥â€à¤Ÿà¤® विकसित हो रहा होता है। बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ में खून से संबंधित विकार हो सकते हैं।शिशॠको हींग कैसे खिलाà¤à¤‚10 महीने की उमà¥à¤° के बाद शिशॠको हींग खिला सकते हैं। इससे कम उमà¥à¤° के बचà¥â€à¤šà¥‡ को हींग न खिलाà¤à¤‚। हींग के पेसà¥â€à¤Ÿ से शिशॠकी नाà¤à¤¿ की मालिश करें। इसके सूखने पर शिशॠको पेट दरà¥à¤¦ से तà¥à¤°à¤‚त राहत दिलाने के लिठबचà¥â€à¤šà¥‡ को डकार दिलवाà¤à¤‚। इसके बाद शिशॠके पेट को गीले साफ कपड़े से पोंछ दें। आप चाहें तो शिशॠको गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ पानी से नहला à¤à¥€ सकते हैं।शिशॠके लिठहींग के फायदे
10 महीने से अधिक उमà¥à¤° के बचà¥â€à¤šà¥‡ के खाने में à¤à¤• चà¥à¤Ÿà¤•ी हींग डालकर खिला सकते हैं। इसके लाठइस पà¥à¤°à¤•ार हैं :
पेट दरà¥à¤¦ : शिशॠके पेट पर हींग लगाà¤à¤‚। पेट दरà¥à¤¦ के कारण बचà¥â€à¤šà¤¾ बहà¥à¤¤ रोता है और हींग में à¤à¤‚टीबैकà¥â€à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² गà¥à¤£ होते हैं जो पेट की लाइनिंग में आठअसंतà¥à¤²à¤¨ को कम करते हैं। ये गैस और à¤à¤¸à¤¿à¤¡à¤¿à¤Ÿà¥€ से à¤à¥€ राहत दिला सकती है।
ओरल हेलà¥à¤¥ : शिशॠके मà¥à¤‚ह कई जीवाणॠघà¥à¤¸ जाते हैं जो कि उसकी ओरल हेलà¥à¤¥ (मà¥à¤‚ह के सà¥â€à¤µà¤¾à¤¸à¥â€à¤¥à¥â€à¤¯) के लिठहानिकारक होते हैं। हींग में à¤à¤‚टीसेपà¥à¤Ÿà¤¿à¤• और à¤à¤‚टीमाइकà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¿à¤¯à¤² गà¥à¤£ होते हैं जो दांत दरà¥à¤¦, कैविटी के इलाज में मदद कर सकते हैं।
पाचन में सà¥à¤§à¤¾à¤° : हींग पाचन में सà¥à¤§à¤¾à¤° लाती है और शिशॠको कबà¥â€à¤œ होने से बचाती है। इससे पाचन तंतà¥à¤° सà¥â€à¤µà¤¸à¥â€à¤¥ होता है।
खांसी, जà¥à¤•ाम और निमोनिया : औषधीय गà¥à¤£à¥‹à¤‚ से यà¥à¤•à¥â€à¤¤ हींग शिशॠको खांसी से à¤à¥€ राहत दिलाती है। गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ पानी में हींग को घोलकर पेसà¥â€à¤Ÿ बनाà¤à¤‚ और उसे शिशॠकी छाती पर लगाà¤à¤‚। इससे खांसी और जà¥à¤•ाम से राहत मिल सकती है। बड़े बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ में असà¥â€à¤¥à¤®à¤¾, निमोनिया और काली खांसी का à¤à¥€ इलाज किया जा सकता है। बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को हींग सà¥à¤‚घाà¤à¤‚।
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